इंजीनियरिंग की उत्कृष्ट रचना – भाखड़ा बांध

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    इंजीनियरिंग की उत्कृष्ट रचना - भाखड़ा बांध

    वर्ष 1992 में पंजाब में उग्रवाद का दौर था और मेरा हरियाणा सिंचाई विभाग की ओर से भाखड़ा बांध के उपमंडल अधिकारी के पद पर स्थानांतरण हो गया. सरकारी आदेशों की पालना की और लगातार आठ वर्षों तक यहां अपनी सेवाएं दीं. पहली बार भाखड़ा बांध देखा और ‘भकलाना से भाखड़ा तक’ की यात्रा का सुखद स्वप्न पूरा हुआ.

    बहुत पुराने व भारी आम व जामुन आदि फलदार पेड़ों की हरियाली से भरपूर व सुन्दर, बी.बी.एम.बी. के आवासीय परिसर, नंगल टाउनशिप (जो कि जिला रुपनगर, पंजाब में है) में आवास मिला. यहां से 13 किलोमीटर दूर, हिमाचल के जिला बिलासपुर के पहाड़ी क्षेत्र में सतलुज नदी पर बना हुआ भाखड़ा बांध तकनीकी उत्कृष्टता की अद्भुत रचना है. यह हमारे राष्ट्र की गौरवशाली बहुउद्देशीय परियोजना है; सिंचाई, बिजली उत्पादन व बाढ़ नियंत्रण इसका मुख्य उद्देश्य व उपयोगिता है. स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू जी का इस बांध को बनवाने में विशेष योगदान रहा और उन्होंने ही इसे ‘भारत का आधुनिक मंदिर’ भी कहा था. उत्साह व उमंग से भरपूर हजारों कर्मचारियों, तकनीशियनों, अभियंताओं व वरिष्ठ अभियंताओं ने मुख्य अमेरिकी विशेषज्ञ एम.एच. स्लोकम (M.H.Slocum) व अन्य देशी विदेशी विशेषज्ञों के दिशा-निर्देश में दिन-रात अथक परिश्रम करके भाखड़ा बांध को बनाने में झोंक दिए. बांध का सक्रिय निर्माण वर्ष 1952 में शुरू हुआ व इसे 22 अक्टूबर 1963 को राष्ट्र को समर्पित किया गया.

    कुतुबमीनार की ऊंचाई से तीन गुना से भी अधिक ऊंचाई वाला, 740 फीट ऊंचा यह बांध एशिया में सबसे ऊंचा व विश्व में दूसरे नंबर का कंक्रीट ग्रेविटी (concrete gravity) बांध है. आसान तरीके से समझाया जाए, तो इस बांध को बनाने में इतना कंक्रीट लगा है जिससे विश्व में, धरती की भूमध्य रेखा के घेरे पर आठ फुट चौड़ी सड़क बनाई जा सकती है. विभिन्न मशीनों, उपकरणों व गेटों आदि के निरीक्षण व रखरखाव व पानी की निकासी आदि के लिए डैम में अलग-अलग तलों पर गैलरी हैं, जिनकी कुल लंबाई 5 किलोमीटर है. आवागमन व अन्य रखरखाव के कार्यों के लिए बांध की 1700 फीट ऊपरी लंबाई में 30 फुट चौड़ी सड़क बनी हुई है.
    बांध के पीछे की ओर सतलुज नदी के बहते हुए जल भंडारण के लिए ‘गोविन्द सागर’ जलाशय है,जिसकी क्षमता 76 लाख एकड़ फीट है, अर्थात् इसमें इतना पानी भरा है जो कि 76 लाख एकड़ के क्षेत्र में एक फुट की गहराई तक भरा जा सकता है.

    इंजीनियरिंग की उत्कृष्ट रचना - भाखड़ा बांध

    बांध के आगे के भाग में दांई व बांई ओर दो पावर हाउस हैं, जहां पानी की ऊर्जा/शक्ति से बिजली पैदा की जाती है. इन बिजली घरों में बिजली पैदा करने के लिए, दस विशाल टरबाइन, विशाल जनरेटरों से जुड़े हुए हैं और इनकी विद्युत उत्पादन की स्थापित क्षमता 1325 मैगावाट है. बांध के जलाशय से पानी 15 फुट व्यास के पेनस्टोक (pen-stock) लोहे का मजबूत पाइप, जो इतने बड़े आकार है कि एक बस उसमें से निकल जाए) से होता हुआ प्रबल शक्ति से टरबाइन की पंखुड़ियों (blades) को टक्कर मार कर घुमाता है व इसके निरंतर घूमने से बिजली संयंत्र में जनरेटर द्वारा बिजली पैदा होती है. आपको जानकार आश्चर्य होगा कि जिस अकेले टरबाइन को घुमाने के लिए एक लाख पच्चीस हजार घोड़ों की ताकत लगानी पड़े, उसी टरबाइन को घुमाने के लिए पानी की प्रबल शक्ति लगभग मुफ्त में घुमाकर बिजली पैदा करती है.

    बांध के गोविन्द सागर जलाशय में पानी का स्तर एक निश्चित सुरक्षित स्तर (EL1680′) से अधिक होने पर बांध के ऊपर बने गेटों से स्पिलवे (spillway) द्वारा नीचे सतलुज नदी में बहा दिया जाता है. और इतनी ऊंचाई से गिरते पानी का विहंगम व सुन्दर दृश्य,प्रसिद्ध नियाग्रा जल प्रपात (Niagara Falls) के नज़ारे का आभास करवाता है. गोविंद सागर में निरीक्षण हेतु जैट बोट व मोटर बोट भी हैं; सर्विस के दौरान इनमें बैठकर बिताया गया स्वर्णिम समय आज भी याद है.

    इंजीनियरिंग की उत्कृष्ट रचना - भाखड़ा बांध

    भाखड़ा बांध का रख-रखाव, संचालन, जल विनियमन, (water regulation) बिजली उत्पादन व वितरण तथा प्रशासन भाखड़ा ब्यास मेनेजमेंट बोर्ड (B.B.M.B.) के आधीन है, हालांकि यहां कार्यरत कर्मचारी व अधिकारी हिस्सेदार राज्यों पंजाब व हरियाणा से हैं.
    जल न केवल अनमोल प्राकृतिक संसाधन है अपितु वास्तव में जीवन है और यह भी कहा जाता है कि ‘जल है तो कल है’. यह बांध वास्तव में पंजाब, हरियाणा व राजस्थान की तो जीवन रेखा है ही; इन राज्यों के विकास में इसका महत्त्वपूर्ण योगदान है और इसी के कारण यहां कृषि व औद्योगिक क्षेत्रों में क्रांति आई व लोगों में आर्थिक संपन्नता आई.
    बहुत से पर्यटक, विशेष कर स्कूलों, कालिजों व तकनीकी संस्थाओं के छात्र, विशिष्ट, अतिविशिष्ट महानुभाव आदि इस आलीशान बांध को देखने के लिए वर्ष भर आते रहते हैं.
    अंत में, यही कहूंगा कि जीवन में बेशक ताजमहल न देख पाएं, भाखड़ा बांध जैसी विशिष्ट कृति एक बार अवश्य देखें. यहां बिताया गया स्वर्णिम समय मुझे हमेशा याद रहेगा.

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