“परिवार”

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    Family

    मस्ती भरी दुनिया
    खेल-कूद का माहौल
    थोड़ी सी डॉट
    और प्यारी प्यारी पुच्चियां
    यही तो है एक परिवार अपना ।

    ना ही किसी का डर
    ना खाने की चिंता
    बस मां का प्यार
    और दादी की कहानियां
    यही तो है एक परिवार अपना ।

    भोला सा मुंह बनाओ
    तो मिल जाए चॉकलेट ,
    थोड़ा रोना दिखाओ
    तो मिल जाए बिस्किट
    बच्चों की मनमानियां और बाबा का मन मनाना
    यही तो है एक अपना परिवार अपना ।

    नानी के पास लड्डू मिल जाएं
    तो मौसी के पास से तोहफे आएं
    भाई-बहनों के साथ खेल खेले जाएं
    और बड़े हमको खेल खिलाएं
    सभी का साथ रहना
    यही तो है एक परिवार अपना

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    Written by my 9 years old daughter Jayati Dixit

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    मैं सुलक्षणा मिश्रा जो कि उत्तर प्रदेश के एक छोटे से जिला मैनपुरी की रहने वाली हूं व उ.प्र. सरकार में एक शिक्षिका के पद पर कार्यरत हूं। मुझे कविता लिखने का शौक तो बचपन से ही था,परंतु प्रथम बार मैंने अपने मन के भावों को लेखनी के माध्यम से उस समय व्यक्त किया जब मैं कक्षा-८ की छात्रा थी। जब मेरी कविताओं को मेरे गुरूजनों,माता-पिता एवं कुछ परिचित कवियों द्वारा सराहा गया,तो मुझे अपने भावों को शब्द देने में और अधिक रुचि आने लगी और कई बार स्थानीय कवि-सम्मेलनों में मंच साझा करने का अवसर भी प्राप्त हुआ। आज मैं इस प्लेटफार्म के माध्यम से उन्ही कविताओं के कुछ अंश आपके समक्ष प्रस्तुत कर रही हूं, आशा है कि आपको पसंद आयेंगे। धन्यवाद।