बाढ़ की विनाशलीला

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    बाढ़ की विनाशलीला
    बाढ़ की विनाशलीला (प्रतीकात्मक तस्वीर)

    जहां एक ओर देश भयावह कोरोना संकट से जूझ रहा है, वहीं उत्तरी व उत्तर पूर्वी राज्यों, विशेषकर असम व बिहार में लोग बाढ़ की विनाशलीला से बेहाल हैं. नदियों के उद्गम स्थलों व स्थानीय क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा हो जाने के कारण मैदानों से बहती हुई नदियों में क्षमता से बहुत अधिक पानी आ जाता है जिसको बहा ले जाने में वे असमर्थ हो जाती हैं और इस कारण से बाढ़ आ जाती है.

    जहां एक ओर ब्रह्मपुत्र नदी को असम की जीवनदायिनी कहा जाता है वहीं मानसून में हर वर्ष यह बाढ़ रूपी विकराल रूप ले लेती है और जन,धन का विनाश करती है और समाचार पत्रों व न्यूज चैनलों के अनुसार अभी कुछ दिनों से इसने वहां बहुत भयावह तबाही मचाई है.

    दूसरी ओर कोसी नदी जिसे ‘बिहार का शोक अथवा अभिशाप’ भी कहा जाता है, ने प्रचंड बाढ़ से जल प्रलय ला दी है व कई जिलों में भयंकर तबाही की है. इस सैलाब के संकट से लाखों लोग बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं व ‘जिन्दगी की जंग’ जारी है. अभी मानसून (वर्षा ऋतु) जारी है और यदि निरंतर अधिक वर्षा हुई तो परिस्थितियां और अधिक गंभीर भी हो सकती हैं.

    हर वर्ष बाढ़ नियंत्रण व संरक्षण की विभिन्न योजनाओं,उपायों व प्रयासों को क्रियान्वित भी किया जाता है, परन्तु संभवतः पर्याप्त व समुचित प्रयास व समाधान नहीं हो पाते हैं.

    आज पर्यावरण संरक्षण आदि न होने अथवा पालन न किए जाने से संभवतः प्रकृति भी असंतुलित हो गई है व विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं की उत्पत्ति का कारण बन गई है और समय समय पर ,सूखा, सुनामी, बिमारियों व बाढ़ आदि के विकराल रूप में झेलनी पड़ती हैं.

    लगभग प्रतिवर्ष आने वाली इस बाढ़ से बर्बादी रोकने व मुक्ति पाने के लिए संबंधित राज्यों व अन्य बाढ़ संभावित प्रदेशों को विशेषज्ञों के साथ मिलकर, मौजूदा विभिन्न उपायों की सही पालना के अतिरिक्त ; सच्ची नियत, ईमानदारी व दृढ़ संकल्प से ‘बाढ़ मुक्ति’ के समुचित व स्थायी हल ढूंढने होंगे