काव्यांजलि भाग-12

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    काव्यांजलि भाग-12
    काव्यांजलि

    जिंदगी की दौड़ में

    जिंदगी की दौड़ में कहां निकल आये ,
    कुछ पता ही न चला ।
    कुछ पाने की होड़ में क्या – क्या खो आये ,
    कुछ पता ही न चला ।

    अपने घर का आंगन छोड़ ,
    आकाश छूने चले थे ।
    नये पंख निकले तो उड़ने लगे थे ,
    छोटे से मन में ख्वाब बड़े-बड़े थे ।
    अपना बचपन उस मिट्टी में छोड़ आये ,
    कुछ पता ही न चला ।

    बड़ा शौक था जब स्टेटस लगाते थे ,
    पीछे का सौंदर्य मित्रों को दिखाते थे ।
    समझते थे कि हम अपडेट बड़े हैं ,
    ये सब कहां उस खेत में खड़े हैं ?
    इस दौड़ में कब सरहद पार कर आये ,
    कुछ पता ही न चला ।

    पर आज इन गोरों के बीच भगदड़ यह कैसी !
    ढेरों लगीं शमशान में ये लाश कैसीं ?
    अपना ही दाँव उल्टा पड़ने लगा था ,
    खेल जिंदगी का अब पलटने लगा था ।
    मौत का मंजर देख क्या हुआ ,
    कुछ पता ही न चला ।

    बरसों पहले लिया फैसला खटकने लगा था ,
    झूठी शान का नकाब अब हटने लगा था ।
    आज वतन की खुशबू सताने लगी थी ,
    पुरानी बात याद आने लगी थी ।
    मां की थपकी कब रुलाने लगी ,
    कुछ पता ही न चला ।

    अपनी संस्कृति के लिए पहचाने जाते हैं ,
    अपने पहनावे और खान-पान से जाने जाते हैं ।
    पर पाश्चात्य रिवाजों में यूं उलझ गए ,
    कि हम अपना वजूद ही खो बैठे ।
    दाल – रोटी छोड़ ; जाने क्या – क्या खाने लगे ,
    कुछ पता ही न चला ।

    बदला नहीं प्रकृति का, यह सिर्फ एक सीख है ,
    काटता था तू जिन्हें यह उन्हीं की चीख है ।
    तू अपनी जिंदगी जी ,
    हमें भी अपनों के साथ रहने दे ।
    न बंद कर पिंजरो में ,
    खुली सांस लेने दे ।
    हमने क्या कष्ट उठाए हैं ?
    तुझे पता ही न चला ।
    जिंदगी की दौड़ कहां निकल आये ,
    कुछ पता ही न चला ।।

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    मैं सुलक्षणा मिश्रा जो कि उत्तर प्रदेश के एक छोटे से जिला मैनपुरी की रहने वाली हूं व उ.प्र. सरकार में एक शिक्षिका के पद पर कार्यरत हूं। मुझे कविता लिखने का शौक तो बचपन से ही था,परंतु प्रथम बार मैंने अपने मन के भावों को लेखनी के माध्यम से उस समय व्यक्त किया जब मैं कक्षा-८ की छात्रा थी। जब मेरी कविताओं को मेरे गुरूजनों,माता-पिता एवं कुछ परिचित कवियों द्वारा सराहा गया,तो मुझे अपने भावों को शब्द देने में और अधिक रुचि आने लगी और कई बार स्थानीय कवि-सम्मेलनों में मंच साझा करने का अवसर भी प्राप्त हुआ। आज मैं इस प्लेटफार्म के माध्यम से उन्ही कविताओं के कुछ अंश आपके समक्ष प्रस्तुत कर रही हूं, आशा है कि आपको पसंद आयेंगे। धन्यवाद।