सच्चा प्रेम “मां”

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    सच्चा प्रेम “मां”

    जन्मी थी मैं छोटी सी
    पाल-पोस कर बड़ा किया
    ‘हे मां’ तूने मेरे दिल को
    अपने प्रेम से भर दिया ।

    मेरे लिए जाने तूनें
    कष्ट कितने झेले,
    मुझे पढ़ा लिखाकर
    एक बड़ा अफसर बनाने के लिए
    तूने मेरा आत्मबल बढ़ा दिया ।
    ‘हे मां’ तूने मेरे दिल को
    अपने प्रेम से भर दिया ।

    रब से मांगा न मैंने चांदी न सोना ,
    अरे मेरे लिए तो मां ही सबसे बड़ा खजाना ।
    न फिल्म स्टार, न ही सिंगर, डांसर हैं ये
    पर पृथ्वी की सबसे बड़ी स्टार हैं ये
    तूने “कोरोना वार्रियर” बनके मुझे
    गर्व का एहसास दिला दिया ।
    ‘हे मां’ तूने मेरे दिल को
    अपने प्रेम से भर दिया ।
    ‘हे मां’ तूने मेरे दिल को
    अपने प्रेम से भर दिया ।।

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    Written by my 9 years old daughter Jayati Dixit

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    मैं सुलक्षणा मिश्रा जो कि उत्तर प्रदेश के एक छोटे से जिला मैनपुरी की रहने वाली हूं व उ.प्र. सरकार में एक शिक्षिका के पद पर कार्यरत हूं। मुझे कविता लिखने का शौक तो बचपन से ही था,परंतु प्रथम बार मैंने अपने मन के भावों को लेखनी के माध्यम से उस समय व्यक्त किया जब मैं कक्षा-८ की छात्रा थी। जब मेरी कविताओं को मेरे गुरूजनों,माता-पिता एवं कुछ परिचित कवियों द्वारा सराहा गया,तो मुझे अपने भावों को शब्द देने में और अधिक रुचि आने लगी और कई बार स्थानीय कवि-सम्मेलनों में मंच साझा करने का अवसर भी प्राप्त हुआ। आज मैं इस प्लेटफार्म के माध्यम से उन्ही कविताओं के कुछ अंश आपके समक्ष प्रस्तुत कर रही हूं, आशा है कि आपको पसंद आयेंगे। धन्यवाद।